शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

पथिक

उठो पथिक! हे चलो पथिक! है जीवन लक्ष्य को पाना ।
लंबा है पथ, दूर लक्ष्य है,   दूर  बहुत  है  जाना   ॥

पग-पग चलना सीख लिया तो बस चलते ही जाना ।
ऊबड़-खाबड़ सीधा-टेढ़ा पथ तो पथ चलते ही जाना ॥


ठोकर लगे तो संभलो पल भर पर रुक कभी न जाना ।
उठते-गिरते, गिरते-उठते  चलते  जाना  चलते जाना ॥ 


एक-एक कर सब पथिकों  का साथ  छूट है  जाना ।
अंत-समय पर अंत-लक्ष्य तक तुमको स्वयं है जाना ॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें